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याद आया किसान (Editorial page) 03rd Fab 2018

By: D.K Chaudhary

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आशा के अनुरूप ही बजट का फोकस किसानों और ग्रामीण क्षेत्र पर रखा। इसे चुनावी बजट कहें या कुछ और लेकिन अपने ढांचे में यह पूरे देश का बजट है। इसका ज्यादा जोर सामाजिक विकास पर है। मुखर तबकों को किनारे रखकर धीरे बोलने वाले नागरिकों के हितों का भी ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो थोड़ा जोखिम उठाते हुए सरकार ने इस बार शहरी मध्यवर्ग के बजाय गांवों और गरीबों को ज्यादा तवज्जो दी है। संदेश साफ है। जब तक जमीनी विकास नहीं होगा, तब तक आर्थिक विकास की गति सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। किसानों की शिकायत दूर करते हुए खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना करने की बात कही गई है। ऐसे में असल चीज है लागत का सही निर्धारण। 2000 करोड़ रुपये की लागत से कृषि उपजों के बाजार का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने की बात कही गई है। किसानों को कर्ज के लिए बजट में 11 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। सरकार चाहती है कि गांवों में न सिर्फ बुनियादी जरूरतें उपलब्ध हों बल्कि वहां तकनीकी सुविधाएं भी जुटाई जाएं ताकि किसानों का हर स्तर पर विकास हो सके। इसके लिए वहां 2 करोड़ शौचालय बनाने, बिजली और गैस कनेक्शन देने के अलावा गांवों में इंटरनेट के 5 लाख हॉटस्पॉट बनाए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का ऐलान किया गया है। सरकार को ध्यान रखना होगा कि इसका असल लाभ कहीं बीमा कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों तक ही सिमट कर न रह जाए। बेहतर होगा कि अस्पतालों की फीस पर नजर रखने के लिए कोई सिस्टम बने। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस साल देश में 70 लाख नए रोजगार पैदा करेगी और 50 लाख युवाओं को नौकरी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। रेलवे बजट भी अब आम बजट का हिस्सा बन चुका है। वित्त मंत्री ने रेलवे को लेकर कुछ घोषणाएं की हैं, पर उनसे कोई साफ तस्वीर नहीं उभर रही कि रेलवे को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और वह इसके जर्जर ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करने जा रही है।
बजट में 3600 किमी रेल पटरियों के नवीनीकरण और इस साल 700 नए रेल इंजन तैयार करने की बात है। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो वेतनभोगी तबके के लिए मायूसी की बात है। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के दाम बढ़ना भी उसके लिए कोई अच्छी खबर नहीं। यानी बजट पर जैजैकार धीमी रहेगी, लेकिन जिस तबके की सुध इसमें ली गई है, उस तक चीजें पहुंच सकीं तो देश में फील गुड का माहौल बनेगा।

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