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विधायक जी पैसे वाले Editorial page 21st Sep 2018

देश भर में विधायकों की सालाना आमदनी को लेकर आई ताजा स्टडी हमारे लोकतंत्र के कुछ अंधेरे पक्षों पर नए सिरे से रोशनी डालती है। यह स्टडी चुनाव सुधारों पर काम करने वाले एनजीओ असोसिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने की है और यह भारत के कुल 4086 विधायकों में से 3145 द्वारा दिए गए स्वैच्छिक आय विवरण पर आधारित है। रिपोर्ट बताती है कि देश की विधायक बिरादरी की औसत सालाना आमदनी 24.59 लाख रुपये है। यहां यह बात भी गौर करने लायक है कि जिन 63 फीसदी विधायकों ने अपनी शैक्षिक योग्यता स्नातक या इससे ज्यादा बताई है उनकी औसत आय 20.87 लाख रुपये है जबकि 5वीं से 12वीं तक की शैक्षिक योग्यता रखने वाले 33 फीसदी विधायकों की औसत आय 31.03 लाख रुपये है। 

दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ज्यादातर विधायकों ने अपनी आमदनी का स्रोत बिजनेस या खेती या दोनों बता रखे हैं। जानकारों के मुताबिक खेती को आय का स्रोत बताने का एक सीधा फायदा यह होता है कि इससे होने वाली आमदनी टैक्स के दायरे में नहीं आती, न ही इसका विस्तृत ब्योरा देने की जरूरत होती है। बहरहाल, ये सारे निष्कर्ष उस विवरण पर आधारित हैं, जो विधायकों ने स्वेच्छा से उपलब्ध कराए हैं। इसलिए माना जा सकता है कि इनका संबंध विधायकों की संपत्ति के उसी हिस्से से है, जो पहले से सरकार की नजर में है और जिसे छुपाने की कोई जरूरत वे नहीं महसूस करते। लेकिन सरकार से छुपाने की जरूरत हो या न हो, यह तथ्य दिनों दिन स्पष्ट होता जा रहा है कि अपने क्षेत्र की जनता से अपनी संपत्ति छुपाने की कोई जरूरत अब उन्हें महसूस नहीं होती। 

जन प्रतिनिधियों की बढ़ती हुई हैसियत या गलत ढंग से बढ़ती उनकी अमीरी बुद्धिजीवियों के एक छोटे से तबके को भले हैरान करे, उनके आम समर्थकों के लिए यह कोई मुद्दा नहीं रह गया है। पहचान की राजनीति ने अब उन्हें बेधड़क बना दिया है। लोग-बाग अपनी जाति या समुदाय के नेताओं की बढ़ती हुई औकात को अपनी खुद की बढ़ी ताकत के रूप में देखते हैं। बाकी लोगों को भले ही यह भ्रष्टाचार का, या राजनीति के अपराधीकरण का मसला लगे, पर अमीर विधायकों का जनाधार उनकी अमीरी को अपने लिए चिंता का विषय नहीं मानता। 

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