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तेल का इंतजाम Editorial page 18th Oct 2018

D.K. Choudhary

ईरान से तेल आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। देश में तेल की कीमत नियंत्रित करने और भविष्य में तेल आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह लगातार हाथ-पैर मार रही है।

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इसमें सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए. अल-फलीह और संयुक्त अरब अमीरात के एक मंत्री के अलावा प्रमुख तेल कंपनियों के सीईओ शामिल हुए। इसमें प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चे तेल के उपभोक्ता देशों को इसके ऊंचे दाम की वजह से कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए तेल उत्पादक देशों का सहयोग बहुत जरूरी है। याद रहे, अमेरिका ने 4 नवंबर के बाद ईरान से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर रखी है। भारत ईरान के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। तेल की हमारी जरूरत का लगभग 14-15 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आता है। इसके एकाएक बंद होने से हमारे सामने समस्या आ सकती है। वैसे सऊदी अरब ने कहा है कि वह भारत को तेल की कमी नहीं होने देगा। प्रधानमंत्री के साथ बैठक में सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री ने यह बात कही लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक तनाव और वैश्विक आर्थिक मंदी की बढ़ती आशंका का असर तेल कीमतों पर पड़ सकता है। यानी हमें तेल पहले की कीमत पर मिलता रहे, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। एक तो देश में पेट्रोलडीजल की कीमत ऐसे ही बढ़ी हुई हैं, 4 नवंबर के बाद क्या होगा, इस बारे में अटकलों का बाजार गर्म है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक तेल की आवक सुनिश्चित करने के लिए घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सऊदी अरब और इराक जैसे अन्य निर्यातकों के साथ पर्याप्त कॉन्ट्रैक्ट कर रखे हैं। ईरान से आयात पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए भी कोशिश जारी है। अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद ईरान को रुपये में ही भुगतान करने का विकल्प बचा रहेगा या नहीं, इसे लेकर बातचीत जारी है। इसके अलावा सरकार तेल भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रही है। सरकार चाहती है कि ऑयल ट्रेडर और प्रड्यूसर इसके लिए निवेश करें। भारत के पास फिलहाल तीन अंडरग्राउंड स्टोरेज मौजूद हैं जिनमें 53 लाख टन से ज्यादा कच्चा तेल स्टोर किया जा सकता है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर भी विचार कर रही है ताकि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की सीमा जल्द से जल्द 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी की जा सके। उम्मीद है कि सरकार देश को तेल की कमी नहीं महसूस होने देगी और अर्थव्यवस्था की गति में कोई व्यवधान नहीं आएगा। 

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